गांधी की हत्या: व्यक्ति, विचार और न्याय का अंतहीन संघर्ष: -जयसिंह रावत- महात्मा गांधी की हत्या केवल एक देह का अंत नहीं थी, बल्कि यह भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में दो विरोधी विचारधाराओं के चरम टकराव का परिणाम थी। जब 30 जनवरी 1948 को बिड़ला भवन की प्रार्थना सभा में नाथूराम गोडसे ने गांधी के सीने में तीन गोलियां दाग दीं, तो उस क्षण केवल
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