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Thursday, July 16, 2015

ECONOMICS OF RELIGIOUS CROWD




मेलों के भीड़तंत्र में श्रद्धालु भगवान भरोसे
-जयसिह रावत-
नासिक के त्र्यंबकेश्वर में गोदावरी के किनारे सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वाजारोहण के साथ ही आन्ध्र प्रदेश के राजामुंद्री जिले में इसी नदी के किनारे मनाये जाने वालेपुष्करममहोत्सव में हुयी भगदड़ ने करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों के रोंगटे खड़े कर दने के साथ ही इस महापर्व के भीड़ प्रबंधकों को भी आगाह कर दिया है। सामान्यतः भगवान या देवी देवताओं के नाम पर श्रद्धालुओं की ऐसी अपार भीड़ें तो जुटा ली जाती हैं मगर उनकी सुरक्षा या भीड़ के प्रबंधन को भगवान के भरासे छोड़ दिया जाता है। अगर ऐसा होता तो उसी गोदावरी के इस छोर पर आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की आंखों के सामने इतनी बड़ी संख्या में लोग भीड़ द्वारा कुचल कर नहीं मारे गये होते!
हमारे देश में आस्था के नाम पर ज्यादा से ज्यादा मानव समूह को आकर्षित करने की होड़ सी लग जाती है। दरअसल इस भीड़ शास़्त्र के साथ एक अर्थशास्त्र भी जुड़ होता है। यही नहीं भीड़ के पैमाने के साथ अपने आराध्य या धर्मस्थल की प्रतिष्ठा को भी प्रतिस्पर्धा में ला कर खड़ा कर दिया जाता है। अगर हरिद्वार महाकंq में तत्कालीन सरकार 9 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का दावा करती है, तो फिर प्रयागराज इलाहाबाद, उज्जैन और नासिक में महाकुंभों के आयोजकों के सामने भी इतनी ही भीड़ जुटाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। कभी कभी इसे प्रतिष्ठा का विषय मान कर भीड़ के आंकड़े बढ़ा-चढ़ा कर भी पेश किये जाते हैं। कुछ सरकारें तो भीड़ आकर्षित करने को नाक का सवाल मान लेती हैं। महाकुंभ तो महाकुंभ ही है, जो कि देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक महा जमावड़ा होता है। लेकिन भीड़ जुटाने में क्षेत्रीय देवी देवताओं के धर्मस्थलों में भी प्रतिपस्पर्धा शुरू हो जाती है। जिस देवी या देवता के मंदिर में जितनी अधिक भीड़ जुटेंगी उसकी उतनी ही अधिक मान्यता मानी जायेगी। जाहिर है कि जितनी अधिक भीड़ जुटेगी उतना ही चढ़ावा भी आयेगा। लेकिन इन मठ मंदिरों या धार्मिक मेलों के आयोजक उस भीड़ की सुरक्षा व्यवस्था को भी भगवान या देवी देवताओं के भरोसे छोड़ देते हैं, जिसका अंजाम भगदड़ ही जैसे हादसे होते हैं।
सूर्य के सिंहस्थ राशि में प्रवेश के साथ ही त्र्यंबकेश्वर में गोदारी के तट पर महाकुंभ शुरू हो गया है। अगले साल 15 अगस्त तक चलने वाले इस महाआयोजन में देश विदेश से लगभग 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसके मुख्य स्नान पवों पर ही एक ही पर्व पर स्नानार्थियों की संख्या करोड़ से कहीं ऊपर चली जाती है। इतने विशाल जनसमूह को नियंत्रित करने की अगर फूलप्रुफ व्यवस्था नहीं की गयी तो महाकंqभों के हादसों का तो रहा दूर यह सिंहस्थ कुंभ अपना ही इतिहास दुहरा सकता है। सन् 2003 इसी कुंभ के अंतिम चरण में मची भगदड़ में लगभग 40 श्रद्धालु कुचल कर अपनी जानें गंवा बैठे थे। समय के साथ ही परिस्थितियों के बदलने से इतनी अधिक भीड़ों को नियंत्रित करना और जन सुरक्षा सुनिश्चित करना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
महाकुम्भों में भगदड़ का लम्बा इतिहास है। हरिद्वार में सन् 1819 के कुम्भ में हुयी भगदड़ में 430 लोग मारे गये थे। सन् 1954 के इलाहाबाद महाकुभ के दौरान हुयी भगदड़ में लगभग 1000 लोगों के मारे गये थे। नासिक के कुम्भ में ही 2003 में हुयी भगदड़ में लगभग 40 लोग मारे गये थे। हरिद्वार में सन् 1986 के कुम्भ में हुयी भगदड़ में 50 से अधिक लोग मारे गये। कुम्भ ही नहीं देश में अन्य धार्मिक आयोजनों के समय भगदड़ की घटनायें अक्सर होती रही हैं। नवरात्रि के अवसर पर 30 सितम्बर 2008 में जोधपुर राजस्थान के चौमुण्डा देवी मन्दिर भगदड़ में 147 के मारे गये थेे और 425 घायल हो गये थे। पुरी रथ यात्रा के दौरान भी भगदड़ में 6 लोग मारे गये थे। इस सदी की सबसे भयावह भगदड़ त्रासदी 2005 में सतारा महाराष्ट्र की मन्धार देवी मेले में हुयी थी जिसमें लगभग 300 लोग दब कर और कुचल कर मारे गये थे। 3 अगस्त 2008 को हिमाचल प्रदेश के नैनादेवी भगदड़ में 162 लोग कुचलकर मारे गये थे और 300 से अधिक घायल हो गये थे। इसी स्थान पर 1978 में हुयी भगदड़ में 65 श्रद्धालु मारे गये थे।
पिछली भगदड़ों पर गौर करें तो ज्यादातर त्रासदियों के लिये अफवाहें जिम्मेदार रही हैं। हिमाचल के नैनादेवी में वर्षा से बचने का आश्रय ढहा था और अफवाह भूस्खलन की फैल गयी। मीडिया जिस तरह आतंकवाद सम्बन्धी खबरों को सनसनीखेज तरीके से पेश करता है, उससे अफवाहों का बाजार जल्दी ही गरमाना लाजिमी ही है। खास कर जब मानव मुण्डों का महासमुद्र एकत्र हो तो कहीं भी और किसी भी कोने से अफवाह आसानी से उड़ाई जा सकती है। आतंकवादियों को भी हथियार लेकर आने की जरूरत नहीं है। छोटी सी वारदात कर तालाब में कंकड़ फेंकने की तरह हलचल पैदा की जा सकती है।
अब तक प्रायः भीड़ का दबाव बढ़ने के कारण ही ऐसे आयोजनों में भगदड़ें होती रही हैं। वीआइपी वेषधारी श्रद्धालुओं के आगमन से भी अव्यवस्था फैल जाती है। इस सच्चाई को ध्यान में रखते हुये सन् 2010 के महाकुंभ में उत्तराखंड सरकार ने तो अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों की आगवानी से साथ इंकार कर दिया था। मगर उस अनुरोध को मानता ही कौन है। दरअसल यह मनाही सत्ताधारी दल के महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिये नहीं होती है। हरिद्वार में इन नेताओं को स्नान कराने के लिये ही 1886 में भीड़ रोकी गयी थी और जब दबाव असहनीय हो गया तो उसे नियंत्रित करने के लिये लाठी चार्ज हुआ और उसके बाद भगदड़ मच गयी। हरिद्वार में ही सोमवती अमावस्या पर मनसा देवी भगदड़ में भी भीड़ का दबाव रोकने के लिये पुलिस द्वारा किया गया लाठी चार्ज ही भगदड़ का करण रहा है। उस भगदड़ में 21 लोग मारे गये थे।
अभी तो नासिक कुंभ का आगाज ही हुआ है। मुख्य स्नानपर्व अभी काफी दूर हैं, इसलिये महाराष्ट्र की राज्य सरकार को भीड़ प्रबंधन के लिये केवल भारत सरकार के साथ बेहतर तालमेल बिठाना है बल्कि इसी तरह हरिद्वार, इलाहाबाद और उज्जैन में महाकुंभों के आयोजनों में शामिल रहे पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की सेवाएं भी लेनी चाहिये। ऐसे आयोजनों में भीड़ को व्यवस्थित करने के लिये डंडाधारी पुलिसकर्मियों के साथ ही पैनी नजर और तेज श्रवणशक्ति वाले खुफिया तंत्र की भी जरूरत होती है। इसके बाद अगल साल जनवरी से हरिद्वार में अर्धकंभ शुरू होना है। उसके लिये उत्तराखंड में कुभ प्रशासन पहले ही गठित कर दिया गया है। इसलिये हरिद्वार कुंभ के प्रबंधकों को नासिक से भी सबक लेने के लिये कहा जाना चाहिये।
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जयसिंह रावत-
पत्रकार
-11  फ्रेंड्स एन्क्लेव,
शहनगर, डिफेंस कालोनी रोड,
देहरादून।
मोबाइल 09412324999
jaysinghrawat@gmail.com






Saturday, June 27, 2015

International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking, to spread awareness against drug-abuse amongst the society.



Press Release

Narcotics Control Bureau, the national nodal agency for drug law enforcement, held a seminarin collaboration with Uttarakhand State AIDS Control Society (USAICS) at the World Integrity Center (WIC), Dehradun on the occasion of 26th June-International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking, to spread awareness against drug-abuse amongst the society.

The program was graced by eminent panelists from different walks of life which included the District Magistrate ShriRavinath Raman, SSP Dehradun ShriPushpakJyoti, Superintendent of NCB Dehradun Shri Ravi Rana, Dr. RajendraPandey (Addl. Project Director, USAICS), Shri Sanjay Gangwar (Counselor, NavinKiran Drug Counselling& Rehabilitation Center) and Shri Jay Singh Rawat (Senior Journalist and Author ).  The audience comprised around 200 people from various walks of life, who had gathered to contemplate on the global concern of increasing drug abuse in the society.

Shri Ravi Kumar Rana, Superintendent, NCB set the agenda for the seminar by highlighting the various issues pertaining to drug abuse in the modern society- nature and scope of the problem, the trends and patterns, vulnerable youth, increasing problem in schools and colleges, role of parents and society. This was followed by the District Magistrate who provided insights on how the civil society and law enforcement can mitigate their different perceptions and procedures to work for a common goal of eradicating drug abuse from the society.  The SSP shared some facts and figures on the problem of drug trafficking in the region, and highlighted the efforts of the Police in tackling the menace. The USAICS representative deliberated on the links between drug abuse and HIV. The Drug Rehabilitation expert pointed out the significance of family ties and the active role which parents and society can play to counter drug abuse. Senior journalist Jay Singh Rawat expressed his views on how the media can play the role of a vigilante in overcoming the dangers posed by drugs.

NARCOTICS CONTROL BUREAU,
                                                                        Govt. of India, Ministry of Home Affairs,
                                                                                                   Dehradun Sub Zonal Unit